पूरा प्रवचन
आप मेरी बात कभी सुनते ही नहीं। तुम हर बात का झगड़ा बना देती हो। अरे रुको, झगड़ा अक्सर मुद्दे से नहीं, उस लहजे से शुरू होता है जिसमें बात कही जाती है। बात छोटी होती है। सब्जी में नमक कम है। फोन क्यों नहीं उठाया? घर देर से क्यों आए? लेकिन पीछे छिपा भाव होता है। तुम मेरी परवाह नहीं करते। रिश्ता बचाना है तो जवाब देने से पहले एक बार सामने वाले का दर्द सुनो। हर बहस जितनी जरूरी नहीं। कभी-कभी अपना घर जितना जरूरी होता है। अब बताइए, झगड़े में पहले किसे शांत होना चाहिए?



