पूरा प्रवचन
सुनो बेटा, हमारे यहाँ विवाहित नारी के श्रृंगार का बड़ा सुंदर भाव माना गया है। नाक की नथ, कानों के झुमके, पांव की पायल और बिछिया, मांग का सिंदूर और माथे की बिंदी। ये सब केवल सजने-सँवरने की चीजें नहीं हैं। ये उसके सौभाग्य, प्रेम और गृहस्थ जीवन की पहचान मानी जाती हैं। पर एक बात मन में धर लेना। नथ सोने की हो या साधारण, बिंदी बड़ी हो या छोटी, सच्चा सौभाग्य आभूषणों से नहीं, पति-पत्नी के प्रेम और सम्मान से बनता है। सिंदूर तभी शुभ है, जब घर में नारी का मान हो। बिछिया तभी सुंदर लगती है, जब उसके मन में दुख न हो और बिंदी तभी चमकती है, जब चेहरे पर अपनापन और संतोष हो। इसलिए श्रृंगार जरूर करना मैया। पर सबसे पहले अपने रिश्ते को प्रेम, भरोसे और मर्यादा से सजाना। भगवान सबका भलो करे। राधे राधे।



