पूरा प्रवचन
एक सवाल पूछता हूँ, पिछली बार किसी ने तुम्हें फोन किया था सिर्फ ये पूछने के लिए कि कैसे हो? बिना किसी काम के, याद करो, कब था वो? ज्यादातर लोगों को याद नहीं आता। क्योंकि आज के ज्यादातर रिश्तों में एक पैटर्न है। फोन तभी आता है जब कुछ चाहिए होता है, मदद चाहिए, सलाह चाहिए या बस वक्त गुजारने का साथी चाहिए? और सच ये है जो रिश्ता सिर्फ जरूरत में याद आए वो रिश्ता नहीं है, सुविधा है। रिश्ता वो होता है जो तब भी रहे जब तुमसे कुछ नहीं मिल रहा। सुविधा वो होती है जो काम निकलते ही गायब हो जाए। अब इसमें गुस्सा करने की बात नहीं है, बस पहचानने की बात है। क्योंकि जब तुम पहचान लेते हो कि कौन रिश्ता है और कौन सुविधा तो तुम अपनी ऊर्जा सही जगह लगाने लगते हो और जो लोग सच में तुमसे जुड़े हैं उनकी कदर भी बढ़ जाती है। तो आज एक काम करो। किसी ऐसे इंसान को फोन करो जिससे महीनों से बात नहीं हुई और बिना किसी वजह के बस पूछो कैसे हो? शायद वही फोन कॉल किसी का दिन बना दे। अगर ये बात दिल तक पहुंची हो तो कमेंट में लिखो सीताराम और भेज दो उसे जो असली रिश्ता निभाता है।



