जिस दिन उम्मीद खत्म, उस दिन सब खत्म?
रिश्तों की बातें

जिस दिन उम्मीद खत्म, उस दिन सब खत्म?

When Hope Ends, Everything Ends?

Ainand Maharaj0:469 जून 2026
अपनों से उम्मीद कम और भगवान पर भरोसा ज्यादा करें।

इस शॉर्ट में उम्मीद और रिश्तों की जटिलताओं पर प्रकाश डाला गया है।

पूरा प्रवचन

रुको। एक बात सच-सच बताना। जब घर में पैसों की तंगी आती है, जब दवाई के पैसे कम पड़ जाते हैं, जब बच्चा फीस के लिए परेशान होता है, तब इंसान सबसे पहले किसे याद करता है? अपनों को, क्योंकि मन कहता है ये अपने हैं, ये समझेंगे। लेकिन दर्द तब होता है, जब वही अपने लोग फोन उठाना बंद कर देते हैं। कोई कहता है, अभी हाथ तंग है। कोई कहता है, बाद में बात करते हैं और कुछ लोग तो हाल पूछने भी नहीं आते। तब आदमी को गरीबी से ज्यादा अपनों की बेरुखी रुलाती है। याद रखना, जिससे उम्मीद ज्यादा होती है, चोट भी उसी से गहरी लगती है। जिस दिन आपने लोगों से उम्मीद कम और भगवान पर भरोसा ज्यादा कर दिया, उसी दिन आपका मन सच में शांत हो जाएगा, क्योंकि लोग समय देखकर साथ देते हैं, लेकिन भगवान भाव देखकर साथ देते हैं। अगर बात दिल में लगी हो तो कमेंट में लिखो राधे-राधे।

रिश्तेउम्मीदभक्तिजीवन पाठमनोबल

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