पूरा प्रवचन
46 साल पहले घर छोड़कर गया बेटा। आज साधु बनकर मां के दरवाजे पर लौटा। चेहरा पूरी तरह बदल चुका था। लेकिन मां ने उसकी आवाज पहचान ली। वो किशोर उम्र में घर से चला गया था। समय बीतता गया लेकिन परिवार को उसके लौटने की उम्मीद बनी रही। साल बीतते गए। मां बूढ़ी हो गई। घर बदल गया और वह बेटा कहीं दूर साधु का जीवन जीता रहा। जैसे ही उसने आवाज लगाई, मां भिक्षा दे दो। मां ठहर गई। चेहरा अनजान था लेकिन आवाज वही थी। दशकों का इंतजार एक आवाज में खत्म हो गया। मां ने चेहरे से नहीं अपने दिल से बेटे को पहचान लिया। बच्चे कितने भी दूर चले जाएं मां का दिल उनके लिए दरवाजा कभी बंद नहीं करता। आपने आखिरी बार मां को कब गले लगाया?



