पूरा प्रवचन
प्यारे जनों, रिश्ते अचानक नहीं टूटते। धीरे-धीरे खराब होते हैं। जब बात बंद होने लगे, जब गुस्सा बढ़ने लगे, जब सुनने की जगह सुनाने की आदत हो जाए, जब प्यार की जगह अहंकार आ जाए, तब रिश्ता बाहर से नहीं अंदर से टूटने लगता है। याद रखो रिश्ते शब्दों से नहीं स्वभाव से बचते हैं। जहां मैं सही हूं ज्यादा हो जाता है, वहां हम साथ हैं। कम हो जाता है। इसलिए अगर रिश्ता बचाना है तो तर्क कम करो, समझ ज्यादा रखो।



