पूरा प्रवचन
मैं तो थम सा गया था। रास्ता रुक सा गया था। तेरे नाम की एक धुन ने फिर से चला दिया। जो डर अंदर बैठा था, धीरे-धीरे हट गया। तेरे साथ होने का असर ही कुछ अलग था। अब जो भी आए सामने, डर नहीं लगता। अब रुकना नहीं, जब तू साथ है। अब झुकना नहीं, जब तू पास है।



