पूरा प्रवचन
आज मिर्जला एकादशी है। पर क्या आपने कभी सोचा, इस दिन चावल खाना मना क्यों है? इसके पीछे एक बड़ी गहरी कथा है। शास्त्रों में कहा गया है, महर्षि मेदा ने जब अपने शरीर का त्याग किया तो उनका अंश इसी पवित्र धरती में समा गया और जिस दिन ये हुआ वही था एकादशी का दिन। उसी अंश से जौ और चावल की उत्पत्ति हुई। इसीलिए इस दिन चावल को निर्जीव अन्न नहीं, एक जीव माना जाता है और एकादशी के पवित्र दिन किसी जीव का सेवन मन को विचलित करता है, साधना को कमजोर। इसलिए यह व्रत सिर्फ भूखा रहने का नहीं है। ये है मन, वचन और कर्म की शुद्धि का। जब आप एक दिन के लिए जीव के स्वाद को त्यागते हैं, तब आप अपनी आत्मा के स्वाद को पहचानते हैं। तो आज इस निर्जला एकादशी पर सिर्फ व्रत मत रखिए, इसका अर्थ भी समझिए और मुझे कमेंट में बताइए आपके घर में यह व्रत कौन-कौन रखता है? जय श्री हरि!



