पूरा प्रवचन
एक आदमी रात को घर से निकला। जेब खाली, आंखें खाली और दिल में बस एक सवाल — अब आगे क्या? उस रात जो हुआ वो सुनो। धंधा डूब गया, दोस्त मुड़ गए, घरवालों की नजरें बदल गई। वो आदमी इतना टूट चुका था कि घर की दीवारें भी भारी लगने लगी थीं। रात को बस निकल पड़ा। कहां जाना है नहीं पता था। रास्ते में एक छोटा सा मंदिर पड़ा। अंदर से आवाज आ रही थी। हारे का सहारा श्याम हमारा, पता नहीं क्यों पांव रुक गए। वो अंदर गया। मंदिर खाली था। बस एक दिया जल रहा था और भजन बज रहा था। वो बाबा की मूर्ति के सामने बैठ गया और फूट पड़ा। बोला सब कहते हैं तू हारे का सहारा है। मैं पूरा हार चुका हूं। अब तू ही बता कहां जाऊं। तभी मंदिर से आवाज आई। जो हार कर आया है वो मेरा हो गया है। उस रात वो आदमी घर लौट आया। हार के साथ नहीं, बाबा के साथ। वही हार जो उसे तोड़ रही थी, वही हार उसे बाबा तक ले आई। याद रखना, जिस दिन सब दरवाजे बंद लगे, उस दिन बस एक नाम लेना श्याम। क्योंकि बाबा का वादा है, दुनिया हारे हुए को छोड़ देती है। बाबा हारे हुए को गोद लेते हैं। अगर भरोसा है बाबा पर तो कमेंट में लिखो हारे का सहारा श्याम हमारा।



