पूरा प्रवचन
उसका बेटा गुस्से में घर छोड़ कर चला गया। जाते-जाते उसने कहा, अब मैं कभी वापस नहीं आऊंगा। एक दिन बीता, फिर एक महीना और देखते-देखते कई साल गुजर गए। लेकिन माँ ने उसका कमरा कभी नहीं बदला। वह रोज उसकी मेज की धूल साफ करती, चादर ठीक करती और दरवाजे की आहट पर बाहर देखती। लोग कहते, अब वो नहीं आएगा। माँ बस इतना कहती, बेटा नाराज है, माँ को भूला नहीं है। कई वर्षों बाद वो बेटा वापस आया। कमरे में कदम रखते ही उसने देखा उसकी पुरानी किताबें, उसकी तस्वीर और बिस्तर आज भी वैसा ही था। वह माँ के पैरों में गिरकर रोने लगा। तब माँ ने उसके सिर पर हाथ रखकर कहा तेरा गुस्सा एक दिन का था बेटा, लेकिन मेरा इंतजार हर दिन का। याद रखना बच्चे नाराज होकर घर छोड़ सकते हैं लेकिन माँ उम्मीद का दरवाजा कभी बंद नहीं करती। जिस माँ ने कभी आपका इंतजार किया है, यह कहानी उसे जरूर भेजिए।



