गर्भ में बच्चे का संघर्ष और माँ का बलिदान
परिवार के मूल्य

गर्भ में बच्चे का संघर्ष और माँ का बलिदान

Struggle of the Child in the Womb and the Sacrifice of the Mother

Ainand Maharaj0:4630 मई 2026
माँ का सम्मान करना और उसकी सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है।

इस प्रवचन में माँ के गर्भ में बच्चे के संघर्ष और माँ के बलिदान की महत्ता पर चर्चा की गई है।

पूरा प्रवचन

एक बात ध्यान से समझिए। इंसान इस धरती पर आते ही रोता क्यों है? क्योंकि जन्म सिर्फ शरीर का नहीं होता। जन्म एक संघर्ष से बाहर आने का नाम है। माँ के गर्भ में जीव नौ महीने एक छोटे से स्थान में रहता है। ना अपनी इच्छा से चल सकता है, ना बोल सकता है, ना अपना दुख किसी से कह सकता है। इसीलिए संतों ने कहा है मनुष्यजन्म बहुत दुर्लभ है, लेकिन दुख की बात देखिए। जिस माँ के गर्भ से हम इस संसार में आए, बड़े होकर उसी माँ की बात हमें भारी लगने लगती है। माँ ने हमें पेट में रखा, गोद में पाला, रात-रात जागकर संभाला और हम बड़े होकर कहते हैं, माँ आप समझती नहीं हो। अरे बेटा, माँ सब समझती है, बस जताती नहीं है। इसलिए जीवन में कितना भी बड़ा बन जाना, माँ की सेवा और भगवान का नाम कभी मत छोड़ना। क्योंकि जिसने माँ का सम्मान किया, उसने भगवान की कृपा का रास्ता खोल लिया। राधे-राधे।

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