पूरा प्रवचन
पापा का आखिरी मैसेज सिर्फ तीन शब्द का था और वो अधूरा था। आज भी जब बेटा उसे पढ़ता है तो उसकी सांस रुक जाती है। पूरी बात सुनो। रोज शाम 06:00 बजे घड़ी की सुई की तरह ठीक 06:00 बजे पापा का फोन आता। बेटा जानता था अभी खाना खाया बेटा वाला फोन आएगा कभी उठाता, कभी रिंग बजने देता। एक थके हुए दिन झल्लाकर बोल ही दिया पापा कोई जरूरी काम हो तभी फोन किया करो ना रोज रोज क्या? फोन की दूसरी तरफ कुछ देर खामोशी रही। फिर धीरे से ठीक है बेटा। उस दिन के बाद वो शाम 06:00 बजे वाला फोन कभी नहीं आया। बेटे को सच में राहत मिली। चलो रोज की टोका टाकी से छुट्टी। 17 दिन यूं ही निकल गए। फिर एक सुबह गांव से वो फोन आया जिसका डर हर बेटे को होता है। पापा अब इस दुनिया में नहीं थे। बेटा भागा भागा घर पहुंचा। पापा के सिरहाने उनका पुराना फोन रखा था। स्क्रीन अभी भी जल रही थी। एक मैसेज टाइप था, भेजा नहीं गया था। लिखा था कोई काम नहीं और बस। आगे के दो शब्द पापा की उंगलियां टाइप ही नहीं कर पाई। बेटा वही फर्श पर बैठ गया। अब समझ आया पापा को कभी कोई काम नहीं था। वो अधूरा मैसेज पूरा होता तो शायद यही होता कोई काम नहीं, बस तेरी आवाज सुननी थी। महादेव कहते हैं जो आज है उसे कल पर मत टालो। वक्त लौटता नहीं। जिसका फोन तुम बाद में कह कर रख देते हो ना, वो बाद में शायद कभी ना आए। आज ही कर लो वो कॉल। दिल कांप गया हो तो लिखो ओम नमः शिवाय।



