पूरा प्रवचन
मां को मोबाइल चलाना नहीं आता था। पर एक काम वो रोज करती थी, बेटे को मैसेज भेजना। बेटा, कभी रिप्लाई नहीं करता था। हर मैसेज एक जैसा होता था। टूटी-फूटी हिंदी में, स्पेलिंग गलत, पर भाव वही। बेटा खाना खाया? बहुत गर्मी है, पानी पीते रहना। तबीयत ठीक है ना? बेटा शहर में था, बिजी था। मैसेज पढ़ता और छोड़ देता। मन में सोचता, रोज रोज क्या वही बात। बाद में रिप्लाई कर दूंगा। फिर एक दिन, मैसेज आना बंद हो गए। बेटे ने ध्यान ही नहीं दिया। तीन दिन। चौथे दिन गांव से फोन आया, मां अब नहीं रही। बेटा गांव पहुंचा, मां का पुराना फोन उठाया। लास्ट मैसेज खुला था, उसी का, जो उसने पढ़कर छोड़ा था। और नीचे, एक मैसेज टाइप किया हुआ था। मां ने भेजा नहीं, शायद हिम्मत नहीं हुई। लिखा था, पता है तू बिजी है, रिप्लाई मत करना। बस इतना बता दे, तू ठीक तो है ना? मां को रिप्लाई नहीं चाहिए था, मां को बस, तू चाहिए था। जिस मां ने हर सांस में तुझे रखा, उस दिन में एक मैसेज देना, भगवान को भोग लगाने से कम नहीं। ये सुनना बंद करो, अभी मां को कॉल करो। राधे-राधे।



