पूरा प्रवचन
एक बेटा रोज सुबह मंदिर जाता था। नहा धोकर तिलक लगाकर भगवान के सामने हाथ जोड़ता था। मंदिर में बहुत शांत, बहुत भक्तिमय दिखता था। लेकिन घर आते ही, माँ ने बस इतना कहा, बेटा एक गिलास पानी दे दे। वो मोबाइल देखते हुए चिढ़कर बोला, माँ खुद भी तो ले सकती हो। हर काम मुझसे ही क्यों करवाती हो? मां चुप हो गई। धीरे से उठी, खुद पानी लिया और कुछ नहीं बोली। शाम को वही मां उसके लिए गर्म रोटी बनाकर बैठी थी। बेटा घर आया थका हुआ था, तो मां ने प्यार से पूछा बेटा। बेटा, खाना लगा दूं? गो बोला, मां अभी नहीं, पहले चैन से बैठने दो। मां फिर चुप हो गई। रात को बेटा सो गया। मां उसके कमरे में आई, पंखा ठीक किया, चादर ओढ़ाई और धीरे से बोली, भगवान मेरे बेटे को खुश रखना। अगली सुबह बेटा फिर मंदिर गया। भगवान से बोला, प्रभु मैं रोज पूजा करता हूं, फिर भी मन को शांति क्यों नहीं मिलती? तभी अंदर से आवाज आई। जिस माँ ने तुझे बिना बोले पानी पिलाया, जिस माँ ने तेरी थकान देखकर रोटी बनाई, जिस माँ ने तेरी नींद में भी तेरे लिए दुआ की, तू उसी माँ की छोटी सी बात पर चिढ़ जाता है। बेटा, मंदिर में मेरा नाम लेने से पहले घर में अपनी माँ से प्यार से बात करना सीख। याद रखना, माँ-बाप की छोटी-छोटी बातों में परेशानी नहीं होती, प्यार छुपा होता है और जो माँ बाप की सेवा नहीं कर पाया, उसकी भक्ति अधूरी रह जाती है। आज माँ बाप साथ हैं तो उनसे ऊंची आवाज में नहीं, प्यार से बात करो। अगर बात दिल में लगी हो तो कमेंट में लिखो। राधे राधे।



