पिताजी की पुरानी डायरी ने बदल दी बेटे की सोच 💔
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पिताजी की पुरानी डायरी ने बदल दी बेटे की सोच 💔

Father's Old Diary Changed Son's Thinking 💔

Ainand Maharaj1:2510 जून 2026
पिता की चुप्पी कमजोरी नहीं, जिम्मेदारियों का बोझ होती है।

एक बेटे की सोच उसके पिता की पुरानी डायरी पढ़ने के बाद बदल जाती है।

पूरा प्रवचन

एक पिता थे, जो घर में सबसे कम बोलते थे। ना ज्यादा प्यार जताते, ना ज्यादा तारीफ करते। बस सुबह जल्दी उठते, काम पर जाते, और रात को थके हुए घर लौटते। बेटा हमेशा सोचता था, पापा को मेरी परवाह ही नहीं है। एक दिन बेटे ने गुस्से में कह दिया, पापा आप मेरे लिए करते ही क्या हो? पिताजी चुप हो गए, कुछ नहीं बोले। बस खाना खाया, और अपने कमरे में जाकर सो गए। रात को बेटा पानी पीने उठा। भर में सब सो चुके थे। वो धीरे से पिताजी के कमरे के पास गया। पिताजी थके हुए सो रहे थे। उनके तकिए के पास एक पुरानी डायरी रखी थी। बेटे ने चुपचाप डायरी उठाई। उसमें लिखा था, बेटे की फीस, इस हफ्ते जमा करनी है। बेटे के जूते, अगले महीने लेने हैं। बेटे का मोबाइल, किश्त बाकी है। घर का राशन, उधार नहीं बनाना। और नीचे लिखा था, दवाई भी लानी है, लेकिन पहले बेटे की जरूरत पूरी करनी है। बेटे के हाथ कांप गए। उसकी आंखें भर आई। उसे पहली बार समझ आया, पिताजी बोलते कम थे, लेकिन सोचते सबसे ज्यादा उसी के लिए थे। अगली सुबह बेटा पिताजी के पास गया। धीरे से बोला, पापा माफ कर दो, मैंने आपको कभी समझा ही नहीं। पिताजी मुस्कुराए, बस इतना बोले, बेटा तू खुश रहना, बस यही मेरी कमाई है, याद रखना। पिता की चुप्पी कमजोरी नहीं होती, वो जिम्मेदारियों का बोझ होती है। मां की ममता दिख जाती है, लेकिन पिता का त्याग अक्सर छुप जाता है। आज अगर पिताजी साथ हैं, तो उनसे प्यार से बात करो। क्योंकि पिता जब तक साथ होते हैं, तब तक घर के ऊपर एक मजबूत छत होती है।

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