पूरा प्रवचन
पिता का प्यार अक्सर शब्दों में नहीं दिखता क्योंकि पिता बोलते कम हैं, निभाते ज्यादा हैं। मां पूछती है बेटा खाना खाया और पिता चुपचाप सोचते हैं मेरे बच्चे को कोई कमी ना रहे। पिता थकते हैं पर बताते नहीं। परेशान होते हैं पर दिखाते नहीं। अपनी इच्छाएं दबा देते हैं ताकि बच्चों के सपने पूरे हो सकें। याद रखना पिता वह पेड़ है जो खुद धूप में खड़ा रहता है लेकिन बच्चों को छाया देता है। जिस पिता ने तुम्हें चलना सिखाया उससे ऊंची आवाज में बात मत करना। पिता को सम्मान दो। उनकी चुप्पी को समझो राधे-राधे।



