पूरा प्रवचन
दुकानदार ने पूछा—“बाबूजी, अपनी चप्पल नहीं लेंगे?” पिता ने अपने फटे हुए जूतों की ओर देखा और बोले—“मेरी पुरानी अभी चल जाएगी… बेटा रोज़ नौकरी ढूँढ़ने जाता है, उसके जूते टूटे हुए अच्छे नहीं लगते।” घर आकर पिता ने अपनी जरूरत छिपा ली। लेकिन रात को बेटे ने उन्हें फटी चप्पल में रस्सी बाँधते देखा। पिता अक्सर अपनी तकलीफ नहीं बताते। वे अपनी जरूरत रोककर बच्चों की जरूरत पूरी करते। आपके पिताजी ने भी कभी अपना मन मारकर आपकी जरूरत पूरी की हो, तो यह कहानी उन तक जरूर पहुँचाइए। 🙏



