पूरा प्रवचन
ग्यारह कटोरी खीर फ्रिज में रखी हुई। ये देखकर बेटा फूट फूट कर रो पड़ा। पूरी बात सुनो। शहर वाला बेटा। बड़ी कंपनी, बड़ी गाड़ी, बड़ा नाम। रोज रात माँ का फोन बेटा खाना खाया और रोज वही जवाब माँ बिजी हूँ बाद में करता हूँ। वो बाद में कभी नहीं आता था। माँ ने पूछा बेटा, इस रविवार आएगा? तेरी पसंद की खीर बनाऊंगी। बेटा बोला माँ समझा करो, काम है। माँ हंसकर बोली, कोई बात नहीं, मैं ठीक हूँ। तू अपना ध्यान रख। उस रविवार बेटे की मीटिंग कैंसिल हो गई। सोचा चलो, माँ को सरप्राइज देता हूँ। बिना बताए घर पहुँचा। दरवाजा खोला, घर में अंधेरा। माँ अकेली बैठी थी और सामने दो थालियाँ लगी थी। माँ बोली, मुझे पता था किसी रविवार तो आएगा। इसलिए हर रविवार तेरी थाली लगाती हूँ। बेटा पानी लेने रसोई गया। फ्रिज खोला, अंदर खीर की कटोरियां रखी थी। एक, दो, पाँच, पूरी ग्यारह। माँ पीछे से धीरे से बोली, तू आता नहीं था और फेंकने का मन नहीं करता था। ग्यारह रविवार, ग्यारह खीर और एक माँ जो हर रविवार दो थालियां लगाकर अकेली बैठती थी। उस दिन बेटा समझ गया। माँ का मैं ठीक हूँ, दुनिया का सबसे बड़ा झूठ है। माँ कभी शिकायत नहीं करती, बस इंतजार करती है। आज बिजी मत होना, आज माँ को फोन करना और हो सके तो इस रविवार घर जाना। अगर आंख भर आई हो तो कमेंट में लिखो। राधे राधे।



