पूरा प्रवचन
एक दिन मां-बाप की आवाज सुनने को तरस जाओगे। आज जब मां बार-बार पूछती है खाना खाया बेटा? तो तुम चिढ़ जाते हो। आज जब पिता कहते हैं ध्यान से जाना, तो तुम्हें लगता है फिर वही पुरानी बात। लेकिन सोचो, एक दिन फोन बजेगा ही नहीं, कोई पूछेगा ही नहीं कहाँ हो, कोई इंतजार करेगा ही नहीं, तब समझ आएगा। मां-बाप की टोका-टाकी परेशानी नहीं थी, वो उनके प्यार का तरीका था। उनकी आवाज में डांट कम, दुआ ज्यादा होती है। इसलिए आज अगर मां-बाप साथ हैं, तो उनकी बातों से चिड़ो मत। दो मिनट बैठो, उनकी आवाज सुनो और प्यार से बोलो हाँ माँ मैं ठीक हूँ। क्योंकि माँ-बाप की आवाज एक दिन याद बन जाती है। अगर बात दिल को लगी हो तो कॉमेंट में लिखो। राधे-राधे।



