पूरा प्रवचन
आज बात मां की है। मां वो है जो खुद भूखी रहकर भी पूछती है बेटा तूने खाना खाया? तुम बड़े हो गए कमाने लगे। दुनिया को समझाने लगे। लेकिन मां के सामने तुम आज भी वही बच्चे हो। मां की ममता छांव सी रखती हरदम साथ। जिस घर मां मुस्कुराए वहां बसे प्रभुनाथ। और याद रखना बेटा अगर औलाद अपने जिस्म की चमड़ी से मां के लिए जूती भी बनवा दे तब भी मां के एहसानों का कर्ज नहीं उतरता। इसलिए मां से ऊंची आवाज में बात मत करो। मां का दिल दुखाकर कोई इंसान सच में बड़ा नहीं बनता, राधे-राधे।



