पूरा प्रवचन
तीन साल की लड़ाई के बाद आखिरकार घर बिक रहा था। आज दोनों भाई आखिरी बार उस घर में खड़े थे सामान खाली करने के लिए। पर जो वहां हुआ किसी ने सोचा नहीं था। पापा के जाने के बाद बंटवारे की लड़ाई शुरू हुई थी। कोर्ट, कचहरी, वकील, तीन साल की खींचतान। आखिर में दोनों भाई थक गए। फैसला हुआ घर बेच दो, पैसे बांट लो, झगड़ा खत्म करो। आज खरीदार को घर सौंपने से पहले आखिरी बार दोनों भाई सामान निकालने आए थे। दोनों अलग अलग कमरों में सामान बांध रहे थे। बिना बात किये तभी छोटे भाई की नजर छत के नीचे वाले कोने पर पड़ी जहां एक पुराना झूला टंगा था। रस्सी अब कमजोर हो चुकी थी। उसने धीरे से झूले को हाथ लगाया। बड़ा भाई भी वहां आ गया। दोनों खड़े रहे, झूले को देखते हुए बड़े भाई ने कहा, इस पर हम दोनों एक साथ बैठते थे। तू आगे मैं पीछे से धकेलता था। छोटा भाई हल्के से मुस्कुराया और हर बार गिरते थे। फिर भी हंसते थे। दोनों की नजर अब कमरे के हर कोने पर जा रही थी। वो दीवार जहां साइकिल के निशान थे, वो खिड़की जहां से दोनों बारिश देखते थे। बड़े भाई की आंखें भर आई। उसने कहा, हम पैसों के लिए लड़ रहे थे और भूल गए कि इस घर में सबसे कीमती चीज हम दोनों ही थे। छोटे भाई ने उसका हाथ पकड़ा। बाहर खरीदार इंतजार कर रहा था। पर दोनों भाई अब एक दूसरे को देख रहे थे। तीन साल बाद पहली बार बिना गुस्से के घर ईंट पत्थर का होता है, पर रिश्ता उससे कहीं बड़ा होता है। आज जिस भाई बहन से बात बंद है, उन्हें एक बार फोन करो, दिल तक पहुंची हो तो लिखो। राधे राधे।



