पूरा प्रवचन
सुनो बेटी, रोज सुबह उठकर सास के पैर जरूर छुआ करो और देखो, सास के कहने का तुरंत बुरा नहीं मानना चाहिए। बुरा मत माना करो। यह सास है ना, एक दिन तुम भी सास बनोगी। उन्हें तुम्हें रोकने, टोकने और समझाने का अधिकार है। हर बात दुश्मनी से नहीं बोलती, तुम्हारी भलाई के लिए ही बोलेंगी, बुरा रास्ता नहीं दिखाएंगी। आज उनकी बात कड़वी लग सकती है, लेकिन उनके चले जाने के बाद तुम्हें इस तरह रोकने, टोकने वाला कोई नहीं रहेगा। जिस बात में तुम्हारी भलाई होगी, वही बात बार-बार समझाएंगी। पहले के समय में बहुएं सोचती थी, हे राम... सास कैसी मिलेगी और अब दो हज़ार छब्बीस में सासें सोचती हैं, हाय राम... बहू कैसी मिलेगी। इसलिए बात का बुरा मत मानो बेटी, सास का आदर करो और उनके अनुभव को समझो। राधे-राधे।



