पूरा प्रवचन
घर की स्त्री जब बोलना बंद कर दे, तो समझ लेना बात छोटी नहीं रही। क्योंकि स्त्री पहले समझाती है, फिर समझौता करती है, फिर सहती है और जब बहुत टूट जाती है, तब चुप हो जाती है। लोग समझते हैं, अब सब ठीक है, अब वो कुछ बोलती नहीं। लेकिन सच ये है, कई बार उसकी खामोशी ही उसके सबसे बड़े दर्द की आवाज होती है। माँ हो, पत्नी हो, बहन हो या बेटी, जिस स्त्री ने घर को संभाला, अगर वही घर में अकेली महसूस करे, तो घर बड़ा होकर भी खाली लगता है। याद रखना, घर की स्त्री को महंगे उपहार से ज्यादा, दो मीठे शब्द चाहिए, सम्मान चाहिए, समय चाहिए और ये एहसास चाहिए कि तुम हमारे लिए जरूरी हो। जिस घर में स्त्री का मन खुश रहता है, वहां बच्चे भी शांत रहते हैं, पुरुष भी सफल होता है और घर में बरकत अपने आप आती है। इसलिए आज से ध्यान रखना, स्त्री की खामोशी को कमजोरी मत समझना। कई बार वही घर बचाने की आखिरी कोशिश होती है।



