पूरा प्रवचन
ये कैसी इंसानियत है? भगवान को प्रणाम और इंसान का अपमान। कुछ लोग रोज मंदिर जाते हैं, भगवान के सामने हाथ जोड़कर कहते हैं, प्रभु! मेरे घर में सुख शांति रखना। लेकिन घर आते ही काम वाली बाई पर गुस्सा शुरू। आज फिर देर से आई, झाड़ू ठीक से नहीं लगाया। इतना पैसा देते हैं, काम तो ढंग से करो। अरे, काम करवाना गलत नहीं है, लेकिन काम करवाते, करवाते किसी इंसान की इज्जत उतार देना गलत है। वो भी किसी की माँ है, किसी की बहन है, किसी के बच्चों का सहारा है। वो तुम्हारे घर की गंदगी साफ करती है, इसका मतलब ये नहीं कि तुम उसके दिल को गंदे शब्दों से भर दो। पैसे देना तुम्हारी जिम्मेदारी है, सम्मान देना तुम्हारे संस्कार हैं। गलती हो तो प्यार से समझाओ, लेकिन गरीब देखकर आवाज ऊंची करना, भक्ति नहीं, घमंड है। याद रखना, भगवान सिर्फ मंदिर की मूर्ति में नहीं है, उस इंसान में भी है जो तुम्हारे घर काम करने आता है। राधे राधे।



