पूरा प्रवचन
जिसे कन्या के पालन-पोषण और उसके जीवन को संवारने का सौभाग्य मिल जाता है, उसके अनेक दुर्भाग्य भी सौभाग्य में बदल जाते हैं। कन्या केवल घर की बेटी नहीं होती। वह घर की कोमलता, करुणा और लक्ष्मी का स्वरूप मानी जाती है। जिस घर में कन्या का जन्म हो, वहाँ उसे बोझ नहीं, भगवान का आशीर्वाद समझना चाहिए। जिनके घर कन्या नहीं है, वे किसी जरूरतमंद बेटी की पढ़ाई, पालन-पोषण या विवाह में सहायता कर सकते हैं। सिर्फ जन्म देना ही सेवा नहीं है। किसी बेटी को सम्मान, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य देना भी बहुत बड़ा पुण्य है। इसलिए भगवान से केवल पुत्र की प्रार्थना मत करना, यह भी कहना प्रभु हमारे जीवन में किसी बेटी की सेवा का अवसर अवश्य देना। याद रखिए कन्या का सम्मान करना, उसकी रक्षा करना और उसे अपने पैरों पर खड़ा करना यही सच्चा कन्यादान है। राधे राधे।



