पूरा प्रवचन
जिस घर में छोटे-छोटे बालक हों, और घर हर समय एकदम साफ-सुथरा दिखे, दीवार पर एक निशान नहीं, खिलौना इधर-उधर नहीं, किताब-कॉपी सब सीधी रखी हो, तो समझ लेना उस घर में बच्चों का बचपन उनसे छीन लिया गया है। और जिस घर में बच्चे हों, वहाँ खिलौने बिखरेंगे, दीवार पर पेंसिल चलेगी, कभी कॉपी फटेगी, कभी किताब इधर-उधर मिलेगी। ये उधम बुरा नहीं है रे। यही तो बचपन की रौनक है। संस्कार जरूर दो, पर इतना कंट्रोल मत करो कि बालक डर-डर के जिए। घर फिर साफ हो जाएगा, दीवार फिर रंग जाएगी, पर बचपन दोबारा लौटकर नहीं आएगा। बात मन में धर लेना। राधे-राधे।



