पूरा प्रवचन
बूंद-बूंद से घट भरे, बूंद-बूंद से खाली। संयम जिसके घर रहे, टिके वहां खुशहाली। घर में पैसा आता है लेकिन रुकता नहीं तो सिर्फ कमाई को दोष मत दो, घर की आदतें भी देखो। आजकल पैसा बड़े खर्चों से कम, छोटे-छोटे खर्चों से ज्यादा निकलता है। कभी फ्लिपकार्ट से ऑर्डर, कभी अमेजन से सामान, कभी UPI से दो सौ इधर, पाँच सौ उधर, कभी अपने शौक और महीने के अंत में वही बात पता ही नहीं चला पैसा कहां चला गया। पैसा एक साथ नहीं जाता, धीरे-धीरे रिसता है। जैसे मटके में छोटा छेद हो तो पानी दिखता नहीं लेकिन खाली जरूर हो जाता है, वैसे ही बिना जरूरत शॉपिंग, बिना सोचे खर्च और उधार लेकर शौक पूरे करना घर की बरकत रोक देता है। लक्ष्मी जी उसी घर में टिकती हैं जहां पैसे की इज्जत होती है। अगर बात सही लगी हो तो कमेंट में लिखो। राधे राधे।



