पूरा प्रवचन
अन्न ग्रहण करने से पहले विचार मन में करना है, किस हेतु से इस शरीर का रक्षण पोषण करना है? रुकिए। आपकी रसोई केवल खाना बनाने की जगह नहीं है। वह आपके घर का सबसे पवित्र स्थान है और शायद आपको इसका अहसास भी नहीं। जब भोजन, प्रेम और अच्छे भाव से बनाया जाता है तो वह केवल खाना नहीं रहता। प्रसाद बन जाता है। हमारे शास्त्रों में अन्न को मां अन्नपूर्णा का स्वरूप माना गया है और जो हाथ पूरे परिवार के लिए रोटी बनाते हैं, वे केवल भोजन नहीं बना रहे होते। वे सेवा और पूजा कर रहे होते हैं। चूल्हे की अग्नि को भी पवित्र माना गया है। इसीलिए पुराने घरों में पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए रखी जाती थी। तो अगली बार रसोई में जाएं क्रोध लेकर नहीं, प्रेम और कृतज्ञता लेकर जाएं। राधे राधे।



