पूरा प्रवचन
एक बात हमेशा याद रखना, जिस घर की स्त्री चुपचाप रोती है, उस घर की बरकत भी धीरे-धीरे चली जाती है। घर की औरत सिर्फ रोटी बनाने वाली नहीं होती। वह घर की शांति होती है। वह घर की इज्जत होती है। वह घर की लक्ष्मी होती है। लेकिन आजकल लोग उसके काम को फर्ज समझते हैं। उसके दर्द को आदत समझते हैं और उसके आंसुओं को छोटी बात समझते हैं। जिस स्त्री ने अपना घर छोड़कर आपका घर बसाया, अगर वही घर में अकेली महसूस करें तो यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। याद रखना, जहां स्त्री का सम्मान होता है, वहां भगवान का वास होता है और जहां स्त्री का दिल टूटता है, वहां सुख ज्यादा देर नहीं टिकता। घर की स्त्री को प्यार दो, सम्मान दो और अपनापन दो। राधे-राधे।



