पूजा के बाद भी मन अशांत क्यों रहता है? | भक्त ने पूछा Ep. 1
भक्ति की बातें

पूजा के बाद भी मन अशांत क्यों रहता है? | भक्त ने पूछा Ep. 1

Why Does the Mind Remain Disturbed Even After Worship? | A Devotee Asked Ep. 1

Ainand Maharaj0:4318 जून 2026
सच्ची भक्ति तब होती है जब मन को भगवान के सामने खोल दिया जाए।

इस प्रवचन में बताया गया है कि पूजा के दौरान मन की अशांति का कारण क्या है और सच्ची भक्ति का अर्थ क्या है।

पूरा प्रवचन

महाराज मैं रोज पूजा करता हूँ, मंत्र भी जपता हूँ। फिर भी मन अशांत रहता है। ऐसा क्यों? क्योंकि बेटा पूजा में शरीर बैठता है लेकिन मन अभी भी दुनिया में भागता रहता है। दीपक भगवान के सामने जलता है और भीतर चिंता जलती रहती है। हाथ माला फेरते हैं लेकिन मन पुराने अपमान, भविष्य का डर और दूसरों से तुलना गिनता रहता है। सिर्फ पूजा करना काफी नहीं है। पूजा के बाद पाँच मिनट शांत बैठो, अपनी चिंता भगवान को कहो। किसी एक बात के लिए धन्यवाद दो और जिस व्यक्ति से मन भारी है उसे भीतर से क्षमा करने की कोशिश करो। याद रखो भगवान के सामने बैठना पूजा है लेकिन मन को उनके सामने खोल देना भक्ति है। अब अगला सवाल आपका है? कमेंट में लिखिए महाराज से क्या पूछना चाहते हैं?

पूजाभक्तिमन की शांतिअशांतिमंत्र-जप

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